Thursday, 7 July 2011

Some poems that have always revived me........whenever I was down with the life !!!

compiled by Kamaljeet Sudan









हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।










व्रक्ष हों, खड़े भले, हों घने, हों बड़े, 
एक पत्र छाँव की माँग मत, माँग मत, माँग मत 
तू ना रुकेगा कभी, तू ना थमेगा कभी
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ
ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है
अश्रु, श्वेत,रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ






















हारता जो नही मुश्किलो से कभी,
जिसका मक़सद है मंज़िल को पाना,
धूप में देखकर थोड़ी सी छाया,
जिसने सीखा नही बैठ जाना,
आग जिसमे "लगान" की जलती है,
"कामयाबी" उसी को मिलती है...

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